भाग्य का लेखा लिखने वाले
तेरे खेल निराले है
कही-कही पर धूप खिली है
कही प्रकाश के लाले है
कही-कही पर शब्दों की गंगा
कही जुबां पर ताले है
भाग्य का लेखा लिखने वाले
तेरे खेल निराले है
कही-कही पर महलों की रंगरलियां
कही मुश्किल हुये निवाले है
कही-कही पर खिलता यौवन
कही बचपन कुंठा के हवाले है
भाग्य का लेखा लिखने वाले
तेरे खेल निराले है
भाई बहन सब द्दूट गये
साली पर मरने वाले है
माँ बाप हुये वृद्धाश्रम के
घर के स्वामी साले है
भाग्य का लेखा लिखने वाले
तेरे खेल निराले है
तेरे खेल निराले है
कही-कही पर धूप खिली है
कही प्रकाश के लाले है
कही-कही पर शब्दों की गंगा
कही जुबां पर ताले है
भाग्य का लेखा लिखने वाले
तेरे खेल निराले है
कही-कही पर महलों की रंगरलियां
कही मुश्किल हुये निवाले है
कही-कही पर खिलता यौवन
कही बचपन कुंठा के हवाले है
भाग्य का लेखा लिखने वाले
तेरे खेल निराले है
भाई बहन सब द्दूट गये
साली पर मरने वाले है
माँ बाप हुये वृद्धाश्रम के
घर के स्वामी साले है
भाग्य का लेखा लिखने वाले
तेरे खेल निराले है