Saturday, March 26, 2016

वो मेघ तो थे नही

वो मेघ तो थे नही
जो दूत बन जाते

वो तो पंक्षी थे
क्यों न पंख फडफड़ाते
वो प्रकाश के
थे आदी
क्यों चन्द्र बनकर
अन्धेरे से दोस्ती
निभाते

चले जब हम
फूलों की डगर पर
साथ थे वो
साये की तरह
काँटों की डगर पर भी
क्यों अपना वो हक
जताते

Thursday, March 24, 2016

मफलर वाले सीoएम० साहब

मफलर वाले सीoएम० साहब
नित नये बदलते रंग।
उनकी अदा को देखकर
गिरगिट भइयाँ दंग।।
दीवाने भईयाँ तुम्ही बताओं
लाये कौन सा रंग।
बस्सी को भी रंग  लगाओं
खतम करो जंग से जंग।।

Wednesday, March 9, 2016

देशद्रोह की परिभाषा को शब्दों से क्यों मोड़ रहे हो

जिस देश में तुमने जनम लिया
उस देश को तुम क्यों तोड़ रहे हो
देशद्रोह की परिभाषा को
शब्दों से क्यों मोड़ रहे हो




भारत की जिस शान के लिये
गाँव का बालक
सीमा पर प्राण गवाँता है
भारत के उस गौरव को
विद्वानों के गढ़ में
कुचला जाता है





गाँव के मास्टर साहब की
सारी शिक्षा भूल गये
राजनीति की हवाओं से
गुब्बारे जैसा फूल गये





राम कृष्ण की धरती पर
महिषासुर बन इठलाते हो
ममतामयी माँ दुर्गा पर
क्या- क्या आक्षेप लगाते हो