Tuesday, February 21, 2023

महकेगा स्मृतियों का वन जब अपनी मुलाकातें होंगी,

महकेगा स्मृतियों का वन जब अपनी मुलाकातें होंगी,
कुछ खट्टे मीठे पल होंगे, प्यार भरी सौगातें होंगी,
जब भी अपनी बातें होंगी बीते कल से महकेंगे पल,
दूर धरा का तम होगा जब चंद्र निशा की बातें होंगी,

स्मृतियों की चुनरी ओढ़ जब भी तुम मेरे सामने आना,
अपने मन की कह लेना कुछ मेरे मन की सुनते जाना,
मेरे मन के फव्वारे से जल की बूंदें निकल रही हैं,
बादल हो जो हृदय तुम्हारे उनको तुम बरसा जाना,

विकास पाण्डेय "जलज"

Sunday, February 19, 2023

मुक्तक- द्वारिकाधीश विराजें मन्दिर, घर- घर बैठा ग्वाला है,

द्वारिकाधीश विराजें मन्दिर, घर- घर बैठा ग्वाला है,
उलझा हुआ जीवन पथ पर, जो चक्र सुदर्शन वाला है,
सजे हुए रथ को ले करके कुरुक्षेत्र में उलझे अपने,
जिसके जीवन में आनन्द, वो ब्रज का नन्दलाला है,

विकास पाण्डेय "जलज"