लेकर सोलह चंद्र कलाएं
तन मन में वह प्रीत जगाए
प्रियतम है वह सारे जग का
संग निशा वो रास रचाएं
तमी शरद की निशा वरद की
जगत में वह कर्षण बिखराये
मधु की वर्षा आज धरा पर
चंद्र की किरणों के संग आए
चन्द्र के चंचल बन्धन से
तन मन में वह प्रीत जगाए
प्रियतम है वह सारे जग का
संग निशा वो रास रचाएं
तमी शरद की निशा वरद की
जगत में वह कर्षण बिखराये
मधु की वर्षा आज धरा पर
चंद्र की किरणों के संग आए
चन्द्र के चंचल बन्धन से
निशा सुगन्धित है मधुबन से
निशा हुयी है दिव्य धरा पर
प्रिय के मधुर आलिंगन से
चंद्र माधुरी की उमंग में
टूट गई है सब सीमाएं
झूम रहे हैं मन, वन उपवन
चंद्र लिये है पूर्ण कलायें
विकास पाण्डेय
चंद्र माधुरी की उमंग में
टूट गई है सब सीमाएं
झूम रहे हैं मन, वन उपवन
चंद्र लिये है पूर्ण कलायें
विकास पाण्डेय