मैं एक चातक जैसा हूं
Sunday, August 28, 2022
मुक्तक- द्वारे ईडी सीबीआई
द्वारे ईडी सीबीआई,
चीख निकल तेरी क्यों आई,
कर्म किए ऐसे क्या तुमने,
जनता से क्या बात छुपाई,
विकास कुमार पाण्डेय "जलज"
नौबस्ता कानपुर
मुक्तक- बूढ़ी आंखें ताक रही है
बूढ़ी आंखें ताक रही है,
बालकनी से झांक रही है
स्वप्न सजो करके अपनों के
धूल सड़क की फांक रही है
विकास कुमार पाण्डेय "जलज"
नौबस्ता कानपुर
Thursday, August 11, 2022
मुक्त धरा है, मुक्त गगन है
मुक्त धरा है, मुक्त गगन है
मुक्त है अपना दाना पानी
अंत हुआ गोरों का शासन
बन्द हुआ है कालापानी
नहीं रहा अब मनमानापन
भाग गये हैं अभिमानी
खुलकर उडते आज परिन्दें
टूट गये है जाल ब्रितानी
किया जिन्होंने जीवन अर्पित
उनको हैं ये शब्द समर्पित
.
सीमा पर जो पड़े हुये हैं
प्रहरी बनकर खडे हुये हैं
शत्रु नही आने पायेगा
बन हिमालय अडे हुये है
राष्ट्रध्वज के नाम पर
जो खेले अपनी जान पर
उन वीरों के सम्मान में
राष्ट्र के अभिमान पर
किया जिन्होंने जीवन अर्पित
उनको हैं ये शब्द समर्पित
समस्त देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) की हार्दिक शुभकामनायें।
विकास कुमार पाण्डेय
नौबस्ता
कानपुर
Sunday, August 7, 2022
मुक्तक- रिश्तों को अपनेपन की धार दीजिए
रिश्तों को अपनेपन की धार दीजिए
न कि आदर सम्बन्धों को तार दीजिए
जिन्दगी में अखाड़े मिलेंगे बहुत से
रिश्तों को रिश्तों का सा प्यार दीजिए
विकास कुमार पाण्डेय "जलज"
नौबस्ता, कानपुर
मो. न. 8004486284
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