Tuesday, January 28, 2020

मुक्तक:- बसन्त रंग धरती, बसन्त रंग व्योम

बसन्त रंग धरती, बसन्त रंग व्योम,
बसन्त का खुमार, ऐसा जैसे रस सोम,
बसन्त से चपलता, बसन्त से तीखे नयन,
बसन्त करे पुलकित, सबका रोम - रोम,



विकास पाण्डेय

Saturday, January 25, 2020

आज गणतंत्र है

मुक्त अब तंत्र है
देश भी स्वतंत्र है
झूमों प्रसन्न हो
आज गणतंत्र है

प्रेम ही यंत्र है
दूर षड्यन्त्र है
रंग तीन तिरंगे
राष्ट्र के मंत्र है


विकास पाण्डेय

Sunday, January 19, 2020

मुक्तक:- वो पद और कद के प्यासे है

वो पद और कद के प्यासे है
हम हीरे से हुये तराशे है
हम धर्म निष्ठ व अनुरागी
और शकुनि के वो पाँसे से है



विकास पाण्डेय

माघ मास, नवमी, कृष्ण पक्ष योग आया

माघ मास, नवमी, कृष्ण पक्ष योग आया,
दो हजार पैतीस विक्रम संवत की छाया।
जब स्वाति विचरण कर रही नक्षत्रलोक,
चातक जातक बन धरा पर जन्म पाया।

माघ की दोपहर सूर्य की सरल आंच,
निरखी विद्वान रहे, जन्म लग्न बाच।
निरखी में पुष्प बरसे, सरहन देव हरषे,
मामा मामी आँगन, रहे हैं मोर नाच।

Wednesday, January 15, 2020

वो मेघ तो थे नही, जो दूत बन जाते

वो मेघ तो थे नही, जो दूत बन जाते
वो पंक्षी, क्यों न अपने पंख चलाते
वो चन्द्र पूर्णिमा कृष्ण पक्ष कैसे आते
क्यों मीत अमावस के बन प्रीत निभाते


चले पुष्प मार्ग हम, थे जो स्नेह लुटाते
वो कंकड कंटक पर, क्यों कष्ट उठाते
बसन्त के संग, जो पुष्प धरा थे खिलते
पतजड संग गले, वो आकर क्यों मिलते



विकास पाण्डेय

Friday, January 3, 2020

जीवन में मेरे कविता देखो

जीवन में मेरे कविता देखो
भोज पत्र पर सरिता देखो
स्थूल धरा पर रह कर जग में
सूर्य चन्द्र तक उड़ता देखो

अश्व कल्पना के संग लेकर
व्योम के पंख पकड़ता देखो
पात्र हुये प्रिय निकट जो मेरे
मिलती उन्हें अमरता देखो


विकास पाण्डेय

Wednesday, January 1, 2020

पौष मास ने सभा लगायी,

पौष मास ने सभा लगायी,
नाचे कंबल और रजाई।
काँप रहे हैं दादा दादी,
ठिठुर रहे भाई भौजाई।

ब्लोअर से कुछ राहत पायी,
सड़क चले तो आफत आई।
पहने जैकेट महफिल में हैं,
भूल गए सूट और टाई।


विकास पाण्डेय