आओ चलो कुछ दीप जलाये
ज्योति से ज्योति मिल जाये
दीपों की ऐसी कड़ी बनाये
रवाली है जिनकी गागर
लाई खिलौना डाल के आये
रोता है सड़कों पर जो जीवन
उसे फुलझड़ी हम पकड़ाये
आओ चलो कुछ दीप जलाये
ज्योति से ज्योति मिल जाये
दीपों की ऐसी कड़ी बनाये
फैला है जहाँ अन्धेरा
चलो वहाँ दीपक बन जाये
अन्धकार से हुये भ्रमित जो
आओ उन्हें हम मार्ग दिखाये
मिट जाये अन्धेरा मन का
ऐसे कुछ हम दीप जलाये
आओ चलो कुछ दीप जलाये
ज्योति से ज्योति मिल जाये
दीपों की ऐसी कड़ी बनाये
तिमिर से खुशियां भटक न जाये
चलो उन्हे हम मार्ग दिखाये
प्रेम समर्पण शान्ति त्याग के
कुछ ऐसे हम दीप जलाये
आये खुशियां सबके जीवन में
और धरा स्वर्ग बन जाये
आओ चलो कुछ दीप जलाये
ज्योति से ज्योति मिल जाये
दीपों की ऐसी कड़ी बनाये
विकास पाण्डेय
ज्योति से ज्योति मिल जाये
दीपों की ऐसी कड़ी बनाये
रवाली है जिनकी गागर
लाई खिलौना डाल के आये
रोता है सड़कों पर जो जीवन
उसे फुलझड़ी हम पकड़ाये
आओ चलो कुछ दीप जलाये
ज्योति से ज्योति मिल जाये
दीपों की ऐसी कड़ी बनाये
फैला है जहाँ अन्धेरा
चलो वहाँ दीपक बन जाये
अन्धकार से हुये भ्रमित जो
आओ उन्हें हम मार्ग दिखाये
मिट जाये अन्धेरा मन का
ऐसे कुछ हम दीप जलाये
आओ चलो कुछ दीप जलाये
ज्योति से ज्योति मिल जाये
दीपों की ऐसी कड़ी बनाये
तिमिर से खुशियां भटक न जाये
चलो उन्हे हम मार्ग दिखाये
प्रेम समर्पण शान्ति त्याग के
कुछ ऐसे हम दीप जलाये
आये खुशियां सबके जीवन में
और धरा स्वर्ग बन जाये
आओ चलो कुछ दीप जलाये
ज्योति से ज्योति मिल जाये
दीपों की ऐसी कड़ी बनाये
विकास पाण्डेय