हम वो पल है जो हमेशा याद आयेगे,
हवा का झौंका नहीं कि छू दूर जायेगे।
सावन की बूंदों में, पतझड़ के पत्तो में
कभी बगिया में तेरी आ बिखर जायेगे।
कभी आंसू, कभी ख़ुशी बन मुस्करायेगे,
तेरे अधरों पर गीत बन गुनगुनाएंगे।
हम वो पल है जो हमेशा याद आयेगे,
हवा का झौंका नहीं कि छू दूर जायेगे।
भूलकर तुम जब किसी पुष्य को उठाओगे
हम उसी मे ख़ुशबू बनकर महक जायेगे।
हम वो पल है जो हमेशा याद आयेगे,
हवा का झौंका नहीं कि छू दूर जायेगे।
यहां जीत पर तो सभी खुशिया मनाते है,
यशोगान करते हैं और गीत गाते हैं।
हम अपनी हार पर भी तो मुस्कुराएंगे
मगर तुम्हारी जीत की खुशियां मनाएंगे।
हम वो पल है जो हमेशा याद आयेगे,
हवा का झौंका नहीं कि छू दूर जायेगे।
-विकास पाण्डेय
हवा का झौंका नहीं कि छू दूर जायेगे।
सावन की बूंदों में, पतझड़ के पत्तो में
कभी बगिया में तेरी आ बिखर जायेगे।
कभी आंसू, कभी ख़ुशी बन मुस्करायेगे,
तेरे अधरों पर गीत बन गुनगुनाएंगे।
हम वो पल है जो हमेशा याद आयेगे,
हवा का झौंका नहीं कि छू दूर जायेगे।
भूलकर तुम जब किसी पुष्य को उठाओगे
हम उसी मे ख़ुशबू बनकर महक जायेगे।
हम वो पल है जो हमेशा याद आयेगे,
हवा का झौंका नहीं कि छू दूर जायेगे।
यहां जीत पर तो सभी खुशिया मनाते है,
यशोगान करते हैं और गीत गाते हैं।
हम अपनी हार पर भी तो मुस्कुराएंगे
मगर तुम्हारी जीत की खुशियां मनाएंगे।
हम वो पल है जो हमेशा याद आयेगे,
हवा का झौंका नहीं कि छू दूर जायेगे।
-विकास पाण्डेय