Saturday, August 22, 2015

दो दिन मेरे  संग चले हो 

दो दिन मेरे
संग चले हो
कहते हो - जनम-जनम
का वादा कर दो,


खाली है
सपनों की गागर
तुम इसको
विश्वास से भर दो,







कंकरीले- पथरीले
रस्तों को
पुष्पों की तुम
चादर कर दो,





अपना यज्ञ, त्याग
तपोबल
सादर मुझे
समर्पित कर दो,



नही हुये तुम मेरे
कहते हो
अपना जीवन
मेरे नाम पर कर दो,







मुझे बनाना है अपना
तो तुम मेरे ही
संग में हो लो,












विकास पाण्डेय









Friday, August 14, 2015

मुक्त धरा है  मुक्त गगन है 

मुक्त धरा है
मुक्त गगन है
मुक्त है अपना
दाना पानी
अंत हुआ
गोरों का शासन
बन्द हुआ है
कालापानी
नहीं रहा अब
मनमानापन
भाग गये हैं
अभिमानी

किया जिन्होंने
जीवन अर्पित
उन्हें हैं ये
शब्द समर्पित

.
सीमा पर जो
पड़े हुये हैं
प्रहरी बनकर
खडे हुये हैं
शत्रु नही
आने पायेगा
बन हिमालय
अडे हुये है

उन वीरों के
सम्मान में
राष्ट्र के
अभिमान पर

किया जिन्होंने
जीवन अर्पित
उन्हें हैं ये
शब्द समर्पित

समस्त देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) की हार्दिक शुभकामनायें।


Vikash Pandey

Kanpur

https://twitter.com/vikpandey

Tuesday, August 11, 2015

कहां भी कुछ नही तुमसे  नही हो दूर तुम मनसे, 


मेरी चाहत तुम्हारी भी
ज़ुबां पर सज गयी है,
रंगो से रंग करके
कहानी बन गयी है,






कभी अपनो की महफिल में,
कभी गैरों की महफिल में,
चर्चा वहां पर आम होता है,
मेरा ही नाम अब तो वहाँ पर
प्यार का पैगाम होता है,    







तेरे आँचल में भी तो
मेरी यादों की कलियाँ है,
जहाँ पर थी कभी महफिल
वहाँ अब सूनी गलियाँ है,







 डूब जाओगे तुम मेरी
चाहत के समन्दर में,
मेरी यादों की कलियों को
अपने दिल में पा करके,
बसा लेना तुम अपनी
सुन्दर सी दुनियाँ
मेरे सपनों में आ करके,







कहां भी कुछ नही तुमसे
नही हो दूर तुम मनसे,
तेरा अब नाम किस्सों में
भी तो है जुड़ गया हमसे,
छिपाना सीख लेना है
तेरी चाहत को इस जगसे,