मुक्त धरा है
मुक्त गगन है
मुक्त है अपना
दाना पानी
अंत हुआ
गोरों का शासन
बन्द हुआ है
कालापानी
नहीं रहा अब
मनमानापन
भाग गये हैं
अभिमानी
किया जिन्होंने
जीवन अर्पित
उन्हें हैं ये
शब्द समर्पित
.
सीमा पर जो
पड़े हुये हैं
प्रहरी बनकर
खडे हुये हैं
शत्रु नही
आने पायेगा
बन हिमालय
अडे हुये है
उन वीरों के
सम्मान में
राष्ट्र के
अभिमान पर
किया जिन्होंने
जीवन अर्पित
उन्हें हैं ये
शब्द समर्पित
समस्त देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) की हार्दिक शुभकामनायें।
Vikash Pandey
Kanpur
https://twitter.com/vikpandey
मुक्त गगन है
मुक्त है अपना
दाना पानी
अंत हुआ
गोरों का शासन
बन्द हुआ है
कालापानी
नहीं रहा अब
मनमानापन
भाग गये हैं
अभिमानी
किया जिन्होंने
जीवन अर्पित
उन्हें हैं ये
शब्द समर्पित
.
सीमा पर जो
पड़े हुये हैं
प्रहरी बनकर
खडे हुये हैं
शत्रु नही
आने पायेगा
बन हिमालय
अडे हुये है
उन वीरों के
सम्मान में
राष्ट्र के
अभिमान पर
किया जिन्होंने
जीवन अर्पित
उन्हें हैं ये
शब्द समर्पित
समस्त देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) की हार्दिक शुभकामनायें।
Vikash Pandey
Kanpur
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