मेरी चाहत तुम्हारी भी
ज़ुबां पर सज गयी है,
रंगो से रंग करके
कहानी बन गयी है,
कभी अपनो की महफिल में,
कभी गैरों की महफिल में,
चर्चा वहां पर आम होता है,
मेरा ही नाम अब तो वहाँ पर
प्यार का पैगाम होता है,
तेरे आँचल में भी तो
मेरी यादों की कलियाँ है,
जहाँ पर थी कभी महफिल
वहाँ अब सूनी गलियाँ है,
डूब जाओगे तुम मेरी
चाहत के समन्दर में,
मेरी यादों की कलियों को
अपने दिल में पा करके,
बसा लेना तुम अपनी
सुन्दर सी दुनियाँ
मेरे सपनों में आ करके,
कहां भी कुछ नही तुमसे
नही हो दूर तुम मनसे,
तेरा अब नाम किस्सों में
भी तो है जुड़ गया हमसे,
छिपाना सीख लेना है
तेरी चाहत को इस जगसे,
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