मेरे अधरों पर तुम गीत बनो,
मधु स्वर कविता मधु संगीत बनो,
सदा रहे मधु मेरे अधरों पर,
प्रिय मीत बनो, मेरी प्रीत बनो,
मेरे अधरों कि प्रिया हो आशा,
मेरे नैनों की तुम हो भाषा,
बसे हुये हो हृदय तुम ऐसे,
जैसे चातक जल का हो प्यासा,
हिय तल प्रणय प्रीत का भाव लिए,
तुम आओं प्रियतम के वास प्रिये,
तेरे सुकोमल मन की ज्योति से,
जल पड़ेंगे अमावस प्रेम दिये,
भेज रहा हूँ भावों का चन्दन,
अन्तस से है तेरा अभिनंदन,
दसों दिशाओं में हो यश तेरा,
जग करता तुम्हारा हो वंदन,
विकास पाण्डेय
मधु स्वर कविता मधु संगीत बनो,
सदा रहे मधु मेरे अधरों पर,
प्रिय मीत बनो, मेरी प्रीत बनो,
मेरे अधरों कि प्रिया हो आशा,
मेरे नैनों की तुम हो भाषा,
बसे हुये हो हृदय तुम ऐसे,
जैसे चातक जल का हो प्यासा,
हिय तल प्रणय प्रीत का भाव लिए,
तुम आओं प्रियतम के वास प्रिये,
तेरे सुकोमल मन की ज्योति से,
जल पड़ेंगे अमावस प्रेम दिये,
भेज रहा हूँ भावों का चन्दन,
अन्तस से है तेरा अभिनंदन,
दसों दिशाओं में हो यश तेरा,
जग करता तुम्हारा हो वंदन,
विकास पाण्डेय
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