Tuesday, April 28, 2020

जग कहता हैं क्यों कवि हूँ मैं

जग कहता हैं क्यों कवि हूँ मैं
किसी मन में बसी छवि हूँ मैं
रात्रि के जुगुनुओं उठो तो
गगन पर चमकता रवि हूँ मैं



विकास पाण्डेय

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