Wednesday, January 1, 2020

पौष मास ने सभा लगायी,

पौष मास ने सभा लगायी,
नाचे कंबल और रजाई।
काँप रहे हैं दादा दादी,
ठिठुर रहे भाई भौजाई।

ब्लोअर से कुछ राहत पायी,
सड़क चले तो आफत आई।
पहने जैकेट महफिल में हैं,
भूल गए सूट और टाई।


विकास पाण्डेय

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