मैं एक चातक जैसा हूं
Wednesday, January 1, 2020
पौष मास ने सभा लगायी,
पौष मास ने सभा लगायी,
नाचे कंबल और रजाई।
काँप रहे हैं दादा दादी,
ठिठुर रहे भाई भौजाई।
ब्लोअर से कुछ राहत पायी,
सड़क चले तो आफत आई।
पहने जैकेट महफिल में हैं,
भूल गए सूट और टाई।
विकास पाण्डेय
1 comment:
Unknown
January 30, 2021 at 11:18 PM
बहुत खूब आदरणीय
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बहुत खूब आदरणीय
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