मैंने यह मुक्तक जुलाई 2017 में लिखा था। यह मुक्तक मंच में अन्तिम कवि के रूप में भी आने पर अपने प्रभाव को कम नहीं होने देता!
आतंक के आकाओं से कह दो-
हाहाकार मचा देंगे।
टूट गया जो धैर्य हमारा
नामोनिशां मिटा देंगे।
माँ भारती के बेटों का
शौर्य तुम्हें दिखा देंगे।
घुस करके आतंक के गढ़ में
भारतवर्ष बसा देंगे।
विकास पाण्डेय
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