Sunday, June 21, 2020

वीर रस के मेरे चार मुक्तक - विकास पाण्डेय

1- 


सिकन्दर भी जहा रोया, मैं वो भारत की माटी हूँ,
जहा विचलित हुआ ग़ोरी, मैं वो वीरो की घाटी हूँ,
चटा दे धूल दुश्मन को, मैं वो भारत की थाती हूँ,
लिखा है प्रेम तलवारों पर, मैं वो वीरो की पाती हूँ,

-विकास पाण्डेय





2-



मैंने यह मुक्तक जुलाई 2017 में लिखा था। यह मुक्तक मंच में अन्तिम कवि के रूप में भी आने पर अपने प्रभाव को कम नहीं होने देता!




आतंक के आकाओं से कह दो-
हाहाकार मचा देंगे।
टूट गया जो धैर्य हमारा
नामोनिशां मिटा देंगे।

माँ भारती के बेटों का
शौर्य तुम्हें दिखा देंगे।
घुस करके आतंक के गढ़ में
भारतवर्ष बसा देंगे।

विकास पाण्डेय





3- 





चीन का कर डाला प्रतिकार,
विश्व में हो रही जय जयकार,
चीनी चमचे हैं शोक मना रहे, 
जयचंदों के यहाँ हाहाकार,



- विकास पाण्डेय




4-



मित्र बनाओ, मित्र रहेंगे
किया प्रहार, रणभूमि मिलेंगे
मिग, मिराज, सुखोई संग
चिनुक, अपाचे ले तुमसे भिडेंगे


- विकास पाण्डेय

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