मुक्त धरा है मुक्त गगन है
मुक्त है अपना दाना पानी
अंत हुआ गोरों का शासन
बन्द हुआ है कालापानी
नहीं रहा अब मनमानापन
भाग गये हैं अभिमानी
खुलकर उड़ते आज परिंदे
टूट गए हैं जाल ब्रितानी।
किया जिन्होंने जीवन अर्पित
उनको हैं ये शब्द समर्पित
टूट गए हैं जाल ब्रितानी।
किया जिन्होंने जीवन अर्पित
उनको हैं ये शब्द समर्पित
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