Monday, October 16, 2017

आओ चलो कुछ दीप जलाये

आओ चलो कुछ दीप जलाये
ज्योति से ज्योति मिल जाये
दीपों की ऐसी कड़ी बनाये
रवाली है जिनकी गागर
लाई खिलौना डाल के आये
रोता है सड़कों पर जो जीवन
उसे फुलझड़ी हम पकड़ाये





आओ चलो कुछ दीप जलाये
ज्योति से ज्योति मिल जाये
दीपों की ऐसी कड़ी बनाये


फैला है जहाँ अन्धेरा
चलो वहाँ दीपक बन जाये
अन्धकार से हुये भ्रमित जो
आओ उन्हें हम मार्ग दिखाये
मिट जाये अन्धेरा मन का
ऐसे कुछ हम दीप जलाये


आओ चलो कुछ दीप जलाये
ज्योति से ज्योति मिल जाये
दीपों की ऐसी कड़ी बनाये





तिमिर से खुशियां भटक न जाये
चलो उन्हे हम मार्ग दिखाये
प्रेम समर्पण शान्ति त्याग के
कुछ ऐसे हम दीप जलाये
आये खुशियां सबके जीवन में
और धरा स्वर्ग बन जाये



आओ चलो कुछ दीप जलाये
ज्योति से ज्योति मिल जाये
दीपों की ऐसी कड़ी बनाये



विकास पाण्डेय

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