Friday, October 25, 2019

लेकर सोलह चंद्र कलाएं

लेकर सोलह चंद्र कलाएं
तन मन में वह प्रीत जगाए
प्रियतम है वह सारे जग का
संग निशा वो रास रचाएं



तमी शरद की निशा वरद की
जगत में वह कर्षण बिखराये
मधु की वर्षा आज धरा पर
चंद्र की किरणों के संग आए


चन्द्र के चंचल बन्धन से
निशा सुगन्धित है मधुबन से
निशा हुयी है दिव्य धरा पर
प्रिय के मधुर आलिंगन से



चंद्र माधुरी की उमंग में
टूट गई है सब सीमाएं
झूम रहे हैं मन, वन उपवन
चंद्र लिये है पूर्ण कलायें




विकास पाण्डेय

No comments:

Post a Comment