मैं एक चातक जैसा हूं
Sunday, February 19, 2023
मुक्तक- द्वारिकाधीश विराजें मन्दिर, घर- घर बैठा ग्वाला है,
द्वारिकाधीश विराजें मन्दिर, घर- घर बैठा ग्वाला है,
उलझा हुआ जीवन पथ पर, जो चक्र सुदर्शन वाला है,
सजे हुए रथ को ले करके कुरुक्षेत्र में उलझे अपने,
जिसके जीवन में आनन्द, वो ब्रज का नन्दलाला है,
विकास पाण्डेय "जलज"
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