जिस देश में तुमने जनम लिया
उस देश को तुम क्यों तोड़ रहे हो
देशद्रोह की परिभाषा को
शब्दों से क्यों मोड़ रहे हो
भारत की जिस शान के लिये
गाँव का बालक
सीमा पर प्राण गवाँता है
भारत के उस गौरव को
विद्वानों के गढ़ में
कुचला जाता है
गाँव के मास्टर साहब की
सारी शिक्षा भूल गये
राजनीति की हवाओं से
गुब्बारे जैसा फूल गये
राम कृष्ण की धरती पर
महिषासुर बन इठलाते हो
ममतामयी माँ दुर्गा पर
क्या- क्या आक्षेप लगाते हो
उस देश को तुम क्यों तोड़ रहे हो
देशद्रोह की परिभाषा को
शब्दों से क्यों मोड़ रहे हो
भारत की जिस शान के लिये
गाँव का बालक
सीमा पर प्राण गवाँता है
भारत के उस गौरव को
विद्वानों के गढ़ में
कुचला जाता है
गाँव के मास्टर साहब की
सारी शिक्षा भूल गये
राजनीति की हवाओं से
गुब्बारे जैसा फूल गये
राम कृष्ण की धरती पर
महिषासुर बन इठलाते हो
ममतामयी माँ दुर्गा पर
क्या- क्या आक्षेप लगाते हो
No comments:
Post a Comment