जब अपनी बातें होंगी
जब अपनी मुलाकातें होंगी
कुछ खट्टे मीठे पल होंगे
कुछ प्यार भरी सौगातें होंगी
कुछ तेरे दिन होंगे
कुछ मेरी रातें होंगी
जब अपनी बातें होंगी
जब अपनी मुलाकातें होंगी
जब अपनी बातें होंगी
जब अपनी मुलाकातें होंगी
यादों की तुम चादर ओढ़े
जब मेरे सामने आना
मेरी कुछ सुन लेना
अपनी भी कहते जाना
जब अपनी बातें होंगी
जब अपनी मुलाकातें होंगी
मेरे मन के फव्वारे से
जल की बूँदें निकल रही हैं
बादल हो जो मन में तुम्हारे
उनको तुम बरसा जाना
जब अपनी बातें होंगी
जब अपनी मुलाकातें होंगी
विकास पाण्डेय
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