Thursday, December 31, 2015

जब अपनी बातें होंगी जब अपनी मुलाकातें होंगी

जब अपनी बातें होंगी
जब अपनी मुलाकातें होंगी



कुछ खट्टे मीठे पल होंगे
कुछ प्यार भरी सौगातें होंगी
कुछ तेरे दिन होंगे
कुछ मेरी रातें होंगी



जब अपनी बातें होंगी
जब अपनी मुलाकातें होंगी



जब अपनी बातें होंगी
जब अपनी मुलाकातें होंगी



यादों की तुम चादर ओढ़े
जब मेरे सामने आना
मेरी कुछ सुन लेना
अपनी भी कहते जाना



जब अपनी बातें होंगी
जब अपनी मुलाकातें होंगी



मेरे मन के फव्वारे से
जल की बूँदें निकल रही हैं
बादल हो जो मन में तुम्हारे
उनको तुम बरसा जाना



जब अपनी बातें होंगी
जब अपनी मुलाकातें होंगी



विकास पाण्डेय


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