Sunday, December 20, 2015

गंगा

मोक्षदायिनी गंगा है,
वर प्रदायिनी गंगा है,
सींचे है लाखों प्राणों को,
जीवन प्रदायिनी गंगा है,

 गंगा का वैभव
सुनाऊँ मैं कैसे
सूर्य के समक्ष
दीपक हूँ जैसे

जनपद काल से
अब तक
गंगा की निर्मल धारा ने

जनपद काल का
वैभव देखा
मुगलों का भी
उद्‌भव देखा
देखी हैं
अंग्रेजों की सत्ता
देखा है
गाँधी का प्रण
देखे हैं
आन्दोलन के क्षण

 सन सत्तावान से
सैतालीस तक
अपने प्यारे लालों का
बहता हुआ
रक्त भी देखा

मोक्षदायिनी गंगा है,
वर प्रदायिनी गंगा है,
सींचे है लाखों प्राणों को,
जीवन प्रदायिनी गंगा है,



 हरिद्वार में
अलख जगायी है
कानपुर की
प्यास बुझायी है
बन्दी माता के मन्दिर का
अद्भुत सौन्दर्य बढ़ाया है
बिठूर के पावन तट ने भी
तेरा वैभव गया है


हे! गंगा तुमने
अनासक्त भाव से
सबको ह्रदय लगाया है
असनी का
मान बढ़ाया है
कौशाम्बी ने
वैभव पाया है
प्रयाग के मस्तक पर
तिलक लगाया है
वाराणसी को
अध्यात्म गुरू का
मान दिलाया है
पटना से बंगाल तक
लाखों का जीवन हर्षाया है



भारत के जन-जन ने
माँ तुझको शीश झुकाया है
सबका मन हर्षाया है
आशा के दीप जलाया है






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