बहुत जल चुका देश मेरा, अब और नहीं जलने दूॅगा,
प्रेम दीप जले न जले, द्वेष की ज्वाला न जलने दूॅगा,
देश मेरा स्वर्ग बने न बने, नर्क नहीं बनने दूॅगा,
राम का राज बसे न बसे, गढ लंकेश न बसने दूॅगा,
विकास पाण्डेय
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