पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को उन्के जन्मदिन 25 दिसम्बर की हार्दिक शुभकामनायें।
उनके जन्मदिन के अवसर पर मैं अपनी इस कविता के माध्यम से उन्हे शुभकामनायें एवं सम्मान देना चाहूँगा।
जन मानस को मोह रहे हो
छिपकर सबको टोह रहे हो
कहते-कहते रूक जाना
रूकते-रूकते कह जाना
चाह नही थी
जिसको
कुछ पाने की
चाह नही थी
जिसको
अभिनन्दन की
चाह नही थी
जिसको
पुष्पहार की
चाह नही थी
जिसको
चन्दन की
चाह नही थी
कुछ पाने की
व्यक्तित्व था
ऐसा मनमाना
निकले थे तुम
जिस पथ से
वह पथ अब तक
कुछ सोच रहा है,
निकला था
एक पथिक
मार्ग से
अब तक
उसको खोज
रहा है,
आयेगा फिर
पथिक हमारा
मार्ग अभी तक
सोच रहा है,
शब्द तुम्हारे
बन मधुशाला
जग को
मोह रहे है
अब तक
बना रहेगा
नाम तुम्हारा
नभ में
सूर्य चन्र्द है
जब तक
ध्रुव तारा भी
सोचता होगा
क्या होगा
कोई मुझसा
जग में
देख तुम्हारी
चमक धरा पर
चकित हो गया
होगा नभ में
कर्तव्य मार्ग पर
रूके नही
बाधाओं से
झुके नही
हटे नही
बाधाओं से
तुम कैसे
रसिया निकले
बच निकले
राधाओं से
किया समर्पित
तुमनें सब कुछ
राष्ट्रवाद के
यज्ञ कुंड में
राष्ट्रवाद के
अश्वमेघ को
विजय पताका
फहरा दी
कारगिल की उॅंची
चोटी-चोटी पर
अटल पताका
फहरा दी
कारगिल की उॅंची
चोटी-चोटी पर
जय घोष
लिखा तुमने
कारगिल की उॅंची
चोटी-चोटी पर
रोक नही
पायी बाधायें
राष्ट्रवाद के
बढते रथ को
मानवता की
अटल राह में
राष्ट्रवाद के
सन्यासी को
कर रहे नमन
अन्तर्मन से
भाव हमारे
शब्द बन गये
तुम पर लिखने की
अटल चाह में
किया उद् घोष
मित्रता का
उस पर जब
प्रहार हुआ
शंखनाद किया तुमने
दुष्टों का संहार हुआ
गरजी तोंपें
जब भारत की
दुश्मन का
संहार हुआ
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