Thursday, June 22, 2017

मदहोश है वो

मदहोश है वो उन्हें मेरी खबर नही है
सोचते है कि डूब जायेगी मेरी नाव
पर मेरी राह में कोई भंवर नही है

अहं के शिखर पर बैठने वालो
जरा झुक के देखो
तुम्हारे लिये उतरने की
कोई डगर नही है

साजिशें रचना तो
फितरत तुम्हारी है
तुम्हारी हरकतों से मैं
बेखबर भी नही हूँ

तुम्हे अच्छी लगती है
रबड़ की मुहरें
मैं रबड़ से बनी
मुहर भी नही हूँ

मेरा नाम मेरी पहचान है
मेरा नाम अपनों की शान है,
मेरे नाम में बसती है एक दुनिया
मेरा नाम मेरे अपनों की जान है,
जीते है कुछ चेहरे मेरे लिये
मेरे नाम के बिना
उनकी दुनिया सुनसान है,

विकास पान्डेय

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