एक दिन मुझसे कानपुर के प्रतिष्ठित आलोचक श्री श्यामसुंदर निगम जी ने पूछा- विकास, बहुत से रचनाकारों के काव्य संग्रह आ चुके है, तुम्हारी कविताओं का संग्रह कब प्रकाशित होगा?
मैंने कहा- बाबूजी, मैं चाहता हूं कि मेरी कविताओं का संग्रह मेरी परिपक्वता को प्रदर्शित करे न कि मेरी अपरिपक्वता एवं अज्ञानता को। अतः अभी दो से ढाई वर्ष का समय लग जायेगा।
No comments:
Post a Comment