Friday, February 12, 2021

मैं घाट बनारस का सा, गंगा सी आओ तुम

मैं घाट बनारस का सा, गंगा सी आओ तुम,
मैं गोकुल की रज जैसा, यमुना सी आओ तुम,
मैं प्रीत चन्द्रमा की, तुम बनके निशा आना,
मैं संगम के तट सा, प्रिय मिलने आ जाओ तुम,


विकास पाण्डेय 

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