मैं एक चातक जैसा हूं
Friday, July 1, 2022
सूखे अंगूर कभी हरे नही होते
सूखे अंगूर कभी हरे नहीं होते
मीठे हैं, पर रस से भरे नहीं होते
वो पिजडें के पशु दुनिया को क्या जाने
जो वन की घास- फूस चरे नहीं होते
विकास कुमार पाण्डेय "जलज"
नौबस्ता, कानपुर
मो. न. 8004486284
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