मैं एक चातक जैसा हूं
Sunday, July 28, 2019
जिसे देखिये वही डर रहा हैं
जिसे देखिये वही डर रहा हैं
मैं हूँ सिकन्दर मगर कह रहा हैं
गुलाबों की रंगत पाने की चाहत में
काटों से मिली यातना सह रहा हैं
लिखे रेत पर जहाँ अपने सपने
मिटाने की हसरत ले समन्दर बह रहा हैं
विकास पाण्डेय
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