बसा डाले जहां भर में हजारों दिल के नगर मैंने
ख्वाहिश रह गयी तेरे दिल में कुटिया बनाने की,
चाहत का जो मसला था बुहुत सीधा- बहुत सादा,
उलझकर रह गया जंग में जैसे तलवारें जमाने की,
ख्वाहिश रह गयी तेरे दिल में कुटिया बनाने की,
चाहत का जो मसला था बुहुत सीधा- बहुत सादा,
उलझकर रह गया जंग में जैसे तलवारें जमाने की,
विकास पाण्डेय
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