मेरे सपनों के रंग बसंती थे
जैसे गुलाब लाजवंती थे
मेरे सपनों की छटा निराली थी
मेरे सपनों में रस की प्याली की
मेरे सपनों में तरुणाई थी
मेरे सपनों में निशा शरमाई थी
मेरे सपनों में कलियां खिलती थी
मेरे सपनों में उपवन हंसते थे
कोयल गीत सुनाती थी
मैना प्रीत बताती थी
मेरे सपनों में पायल की छन-छन
मेरे सपनों में चूड़ी की खन-खन
मेरे सपनों में केशो के बादल
मेरे सपनों में नैन नशीले थे
मेरे सपनों में सावन की बूँदें
मेरे सपनों में दुपट्टे गीले थे
समय की ऐसी आंधी आयी
सारे सपने टूट गये
कलियां, कोयल, मैना, उपवन
सारे मुझसे छूट गाये
मेरे सपनों में ऐसे मंजर है
जिनमें तलवारें खंजर है
मेरे सपनों में बजे नगाड़े हैं
मेरे सपनों में सिंह दहाड़े हैं
मेरे सपनों घोड़ो की टापें
गजराजों की चिघाड़े हैं
मेरे सपनों में हल्दी घाटी है
मेरे सपनों में शौर्य मराठी है
मेरे सपनों में राणा का तप है
मेरे सपनों में बाजीराव का बल है
विकास पाण्डेय
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