Sunday, July 5, 2015

हमने तो अभी कलम थामी है,

हमने तो अभी
कलम थामी है,
मेरे बारे में
कुछ कहना अभी
बेमानी है,
समय के शातिर
शिकंजे से
निकलकर
हमें अपनी भी
एक जमीन बनानी है,







तुम सोचते हो
हमारे भाग्य में
अंधेरे है,
मगर हमने तो
उजाले को भी
हराने की  ठानी है,






समय के पन्नों पर
लिखनी अपनी भी
एक कहानी है,







जो सहमा था
वो मेरा बचपन था
जिसने हवाओं से
लड़ने की ठानी है
वो मेरी जवानी है,
ऐ हवाओं मेरा
विरोध छोड़ दो
मेरे अतीत में
संघर्षों की एक
कहानी है,






Vikash Pandey

Kanpur

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