फूलों का खिलना
एक कल्पना है,
वास्तविकता
तो मुर्झाना है,
सिर उठाकर
खड़ा होना
एक अहम है
वास्तविकता
तो झुक जाना है ,
फसलों का लहराना
क्षण भर की
अनुभूति हैं
वास्तविकता तो
पक जाना है,
बादल बनना तो
क्रिया मात्र है
वास्तविकता तो इसका
पानी बन जाना है,
विशालता तो हिमालय का
गर्व मात्र है इसे भी एक दिन
अपना अस्तित्व गवाँना है,
पेड खड़ा है तन करके
एक दिन इसको भी
गिर जाना है,
.आज जहाँ है
सागर की लहरें
वहाँ एक दिन
फसलों को
लहराना है,
Vikash Pandey
Kanpur
एक कल्पना है,
वास्तविकता
तो मुर्झाना है,
सिर उठाकर
खड़ा होना
एक अहम है
वास्तविकता
तो झुक जाना है ,
फसलों का लहराना
क्षण भर की
अनुभूति हैं
वास्तविकता तो
पक जाना है,
बादल बनना तो
क्रिया मात्र है
वास्तविकता तो इसका
पानी बन जाना है,
विशालता तो हिमालय का
गर्व मात्र है इसे भी एक दिन
अपना अस्तित्व गवाँना है,
पेड खड़ा है तन करके
एक दिन इसको भी
गिर जाना है,
.आज जहाँ है
सागर की लहरें
वहाँ एक दिन
फसलों को
लहराना है,
Vikash Pandey
Kanpur
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