एक दिन सोचा चलो
उपवन में जाये,
पुष्पों और कलियों के
संग खिलखिलायें,
हमें देख कुछ कलियाँ
गुनगुनाने लगी,
कुछ मिलन की लगन
जगाने लगी,
कुछ अपने ह्रदय की व्यथा को
सुनाने लगी,
कुछ हिचकिचाहट में मुख को
छिपाने लगी,
भौंरों को देख वो संकोच
जताने लगी,
भौरों के जाने की प्रतीक्षा में
समय को गवाँने लगी,
रात होने लगी,
भौंरे सोने लगे,
अब सभी कलियाँ हमसे मिल खिलखिलाने लगी,
भूल व्यथा वेदना मेरे संग
सुन्दर गीत गाने लगी,
रात्रि जाने लगी,
प्रातः होने लगी,
चल रही थी मीठी सुगन्धित पवन,
मन्दिरों में भी हो रहा था हवन,
अब मेरी विदाई की बेला भी
आने लगी,
मेरी विदाई को निकट देखकर
वो विरह वेदना को सुनाने लगी,
उपवन में जाये,
पुष्पों और कलियों के
संग खिलखिलायें,
हमें देख कुछ कलियाँ
गुनगुनाने लगी,
कुछ मिलन की लगन
जगाने लगी,
कुछ अपने ह्रदय की व्यथा को
सुनाने लगी,
कुछ हिचकिचाहट में मुख को
छिपाने लगी,
भौंरों को देख वो संकोच
जताने लगी,
भौरों के जाने की प्रतीक्षा में
समय को गवाँने लगी,
रात होने लगी,
भौंरे सोने लगे,
अब सभी कलियाँ हमसे मिल खिलखिलाने लगी,
भूल व्यथा वेदना मेरे संग
सुन्दर गीत गाने लगी,
रात्रि जाने लगी,
प्रातः होने लगी,
चल रही थी मीठी सुगन्धित पवन,
मन्दिरों में भी हो रहा था हवन,
अब मेरी विदाई की बेला भी
आने लगी,
मेरी विदाई को निकट देखकर
वो विरह वेदना को सुनाने लगी,
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