कलियुग में मेरे साथ बड़ी बात हुयी
त्रेता के चरित्र रावण से मेरी मुलाकात हुयी
रावण अहं ब्रह्म अस्मि चिल्लाया
आई एम आल्सो ए ब्राम्ह्मण
मैने उसे बताया
रावण ने कहा- संस्कृत में बताओ
मैने कहा राजभाषा में आ जाओ
वो भी हिन्दी में आया
मैने अंग्रेजी का भूत भगाया
रावण ने पूँछा-
कौन सा युग है मुझे बताओ
मैंने कहा-
पॉकेट कैलेन्डर तो दिखाओ
रावण ने कहा-
राजा हूँ मै मुझे काम बताते हो
अपनी मृत्यु को बुलाते हो
उसने मुझे राजतंत्र की अकड़ दिरवायी
मैने उसे अपनी दिल्ली तक की पकड़ बतायी
मैने कहा- राजाजी
अपने राजतंत्र को भूल जाओ
भारत में लोकतंत्र है
अपनी अकड़ न दिखाओ
राजाओं के प्रिवी पर्स छिन गये है
जो बच गये है वो भी दिन गिन रहे हैं
मैंने कहा-
इस युग में इतना गहना पहन कर शोर मचाओगे
किसी डकैत ने सुन लिया तो लंगोट में ही वापस जाओगे
तुम्हारी तलवार यहां काम नही आयेगी
जब ए० के० 47 अपना रूप दिखायेगी
यदि अधिक उपद्रव मचाओगे
तो रा०सु०का० में अन्दर जाओगे
मेरे विचारों ने कुछ प्रभाव दिखाया
रावण का गरम मस्तिष्क थोड़ा सा ठंडाया
मैने कहा-
अनुचित समय में पृथ्वी लोक में चले आये हो
लगता है स्वर्ग में उचित स्थान नही पाये हो
इन्द्र ने तुम्हारे विरुद्ध षड़यंत्र रचाया है
इसीलिये कलियुग में तुम्हें
पृथ्वी लोक का मार्ग दिखाया है
इस समय पृथ्वी पर
कलियुग की छत्रछाया है
नेताओं का वैभव
कोने-कोने में समाया है
इन नेताओं से देवराज भी डरते है
इनके कारण आजकल
पृथ्वी लोक पर नही उतरते है
मैं तुम्हे नेताओं के बारे में विस्तार से बताता हूँ
कलियुग के शासक नेताओं की चालीसा तुम्हें सुनाता हूं
आप मांस खाते थे
मदिरा पीते थे
आपके सहयोगी भी
आपकी को तरह जीते थे
आप शत्रुओं को मिटाते थे
मित्रों पर रत्न लुटाते थे
कलियुग के शासक नेता
समानता को आधार बनाते है
शत्रु और मित्र में
कोई अन्तर नही दिखाते है
शत्रुओं को भी
मित्रों के समान गले लगाते है
मित्रों को भी
शत्रुओं के समान चाट जाते है
मैने विस्तार से रावण को
नेता चालीसा सुनाया
मैंने एक आश्चर्यजनक
दृश्य पाया
रावण के आंखों में थी
आँसुओं की छाया
रावण ने कहा-
नेता चालीसा सुनकर
मेरी आँखे भर आयी है
कलियुग की महिमा देखकर
मेरी आँखे चौधियाई है
अब मुझे तुरन्त
अपने लोक है जाना
कलियुग में पुनः मुझे
पृथ्वी लोक नही आना
Vikash Pandey
Kanpur
त्रेता के चरित्र रावण से मेरी मुलाकात हुयी
रावण अहं ब्रह्म अस्मि चिल्लाया
आई एम आल्सो ए ब्राम्ह्मण
मैने उसे बताया
रावण ने कहा- संस्कृत में बताओ
मैने कहा राजभाषा में आ जाओ
वो भी हिन्दी में आया
मैने अंग्रेजी का भूत भगाया
रावण ने पूँछा-
कौन सा युग है मुझे बताओ
मैंने कहा-
पॉकेट कैलेन्डर तो दिखाओ
रावण ने कहा-
राजा हूँ मै मुझे काम बताते हो
अपनी मृत्यु को बुलाते हो
उसने मुझे राजतंत्र की अकड़ दिरवायी
मैने उसे अपनी दिल्ली तक की पकड़ बतायी
मैने कहा- राजाजी
अपने राजतंत्र को भूल जाओ
भारत में लोकतंत्र है
अपनी अकड़ न दिखाओ
राजाओं के प्रिवी पर्स छिन गये है
जो बच गये है वो भी दिन गिन रहे हैं
मैंने कहा-
इस युग में इतना गहना पहन कर शोर मचाओगे
किसी डकैत ने सुन लिया तो लंगोट में ही वापस जाओगे
तुम्हारी तलवार यहां काम नही आयेगी
जब ए० के० 47 अपना रूप दिखायेगी
यदि अधिक उपद्रव मचाओगे
तो रा०सु०का० में अन्दर जाओगे
मेरे विचारों ने कुछ प्रभाव दिखाया
रावण का गरम मस्तिष्क थोड़ा सा ठंडाया
मैने कहा-
अनुचित समय में पृथ्वी लोक में चले आये हो
लगता है स्वर्ग में उचित स्थान नही पाये हो
इन्द्र ने तुम्हारे विरुद्ध षड़यंत्र रचाया है
इसीलिये कलियुग में तुम्हें
पृथ्वी लोक का मार्ग दिखाया है
इस समय पृथ्वी पर
कलियुग की छत्रछाया है
नेताओं का वैभव
कोने-कोने में समाया है
इन नेताओं से देवराज भी डरते है
इनके कारण आजकल
पृथ्वी लोक पर नही उतरते है
मैं तुम्हे नेताओं के बारे में विस्तार से बताता हूँ
कलियुग के शासक नेताओं की चालीसा तुम्हें सुनाता हूं
आप मांस खाते थे
मदिरा पीते थे
आपके सहयोगी भी
आपकी को तरह जीते थे
आप शत्रुओं को मिटाते थे
मित्रों पर रत्न लुटाते थे
कलियुग के शासक नेता
समानता को आधार बनाते है
शत्रु और मित्र में
कोई अन्तर नही दिखाते है
शत्रुओं को भी
मित्रों के समान गले लगाते है
मित्रों को भी
शत्रुओं के समान चाट जाते है
मैने विस्तार से रावण को
नेता चालीसा सुनाया
मैंने एक आश्चर्यजनक
दृश्य पाया
रावण के आंखों में थी
आँसुओं की छाया
रावण ने कहा-
नेता चालीसा सुनकर
मेरी आँखे भर आयी है
कलियुग की महिमा देखकर
मेरी आँखे चौधियाई है
अब मुझे तुरन्त
अपने लोक है जाना
कलियुग में पुनः मुझे
पृथ्वी लोक नही आना
Vikash Pandey
Kanpur
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